Friday, 4 September 2015

Welcome Back Movie Review





डायरेक्टर: अनीस बज्मी
कलाकार:- नाना पाटेकर (उदय शेट्टी), अनिल कपूर (मजनू भाई), जॉन अब्राहम (अज्जू भाई), श्रुति हासन (रंझना), परेश रावल (डॉ घुंघरु), डिंपल कपाड़िया (महारानी) और नसीरुद्दिन शाह (वॉन्टेड भाई)

आज से 8 साल पहले यानी 2007 में रिलीज हुई फिल्म 'वेलकम' का सीक्वल 'वेलकम बैक' काफ़ी हद तक पिछली फिल्म की कहानी और कॉमेडी फॉर्मूलों को दोहराती हुई नज़र आती है. फिल्म के कुछ नए किरदार भी शामिल हुए हैं लेकिन मूल रूप से फिल्म का पूरा ढांचा वही है. अगर आप नो एंट्री, सिंह इज़ किंग या वेलकम जैसी अनीस बज़्मी ब्रांड की कॉमेडी पसंद करते हैं, तो 'वेलकम बैक' आपको निराश नहीं करेगी. फिल्म के कई सीन आपको हंसाएंगे. ख़ासतौर पर अनिल कपूर और नाना पाटेकर की जोड़ी ने फिल्म को पूरी तरह संभाल लिया है.
 कहानी:-
'वेलकम बैक' की शुरुआत वहीं से की है जहां पिछली फिल्म ख़त्म हुई थी. गैंग्स्टर से शरीफ आदमी बन चुके उदय शेट्टी (नाना पाटेकर) और उसके भाई यानी मजनू भाई (अनिल कपूर) ने दुबई में अपना नया बिजनेस शुरु किया है. इसी बीच एंट्री होती है राजकुमारी बबिता (अंकिता श्रीवास्तव) की, जिनके एकतरफा इश्क में उदय और मजनूं भाई कायल हैं। अभी उनके शादी की बात चल ही रही थी कि तभी उदय को अपनी कुवांरी सौतेली बहन रंजना (श्रुति हासन) का पता चलता है. साथ ही फिल्म में एंट्री होती है अज्जु भाई (जॉन अब्राहम) की. अब एक तरफ अज्जु भाई और रंझना की लव स्टोरी है तो वहीं दूसरी तरफ उदय और मजनू, महारानी (डिंपल कपाड़िया) की बेटी चांदनी (अंकिता श्रीवास्तव) के प्यार में पागल होने लगते हैं.
एक्टिंग:-
एक्टिंग के मामले में एक बार फिर अनिल कपूर, नाना पाटेकर, राजपाल यादव और परेश रावल ने बेवकूफ़ी से भरे सीन्स में भी, बड़ी मेहनत से कॉमेडी करने की कोशिश की है. लंबे अरसे बाद सिल्वर स्क्रिन पर कमबैक कर रहे जॉन अब्राहम भी अपने रोल में फिट हैं. लेकिन नसीरुद्दीन शाह की एक्टिंग से ऐसा लग रहा है कि उनके किरदार को अनीस बज्मी ने खुलकर कहने का मौका नहीं दिया गया. वहीं रेप के आरोप में जेल की सजा काटकर आए शाईनी आहूजा का अच्छा वेलकम बैक हुआ है, लेकिन कहीं ना कहीं अक्षय कुमार की कमी फिल्म में खलती रही.हालांकि कब्रिस्तान में एक अंताक्षरी वाला सीक्वेंस काफ़ी अनोखा और हंसाने वाला है
डायरेक्शन
डायरेक्टर अनीस बज्मी ने इसमें सिचुएशन कॉमेडी का ओवरडोज और जबरदस्त वन लाइनर्स डाले हैं। लेकिन कहीं-कहीं पर वे थोड़ा असफल से नजर आए। इंटरवल से पहले का हिस्सा जहां आपको लोटपोट करने पर मजबूर करता है। वहीं, इंटरवल के बाद कहानी खोई-सी लगती है। एक-दो गानों को छोड़ दिया जाए तो ऐसा लगता है कि फिल्म की अवधि बढ़ने के लिए इसमें जबरदस्ती गाने डाले गए हैं। अनीस ने इस बार नाना, अनिल के किरदार को पहले से ज्यादा पावरफुल बनाया है, जो इसकी यूएसपी है।
बात अगर म्यूजिक की की जाए तो इस फिल्म में म्यूजिक 'वेलकम' की ही तरह रखा गया है, फिल्म में एक तरफ उदय और मजनू के साथ चांदनी के लव सॉन्ग को दिखाया गया है तो वहीं दूसरी तरफ अज्जू और रंझना के रोमांस के साथ पूरे परिवार का 'तूती बोले वेडिंग दी' गीत भी दर्शाया जाता है. सही मायने में देखा जाए तो फिल्म के एक-दो सॉन्ग ऐसे हैं, जिनकी कोई जरूरत नहीं थी.
 क्यों देखें:- अनिल कपबर-नाना पाटेकर की लाजवाब जोड़ी, कॉमेडी की भरपूर डोज़ के लिए इस वीकेंड वेलकम बैक देखी जा सकती है.  'सांप, पानी और बादशाह खान तीनों थोड़ी सी जगह मिलने पर कहीं भी घुस जाते हैं' डायलॉग से लेकर 'भगवान का दिया सब कुछ है...' जैसे डायलॉग आपका पैसा वसूल कर देंगे.
क्यों ना देखें:- फिल्म की कहानी में कुछ भी नया नहीं है. फिल्म की लगभग सबी सिचुएशन पुरानी वेलकम से ली गई हैं. सेकेंड हाफ में फिल्म काफ़ी कमजोर पड़ जाती है. क्लाइमेक्स में भी डायरेक्टर अनीस बज्मी ने कुछ खास नहीं किया है. फिल्म में अक्षय कुमार की कमी आपको खल सकती है
रेटिंग-  ढाई स्टार